Hindi Poetry लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Hindi Poetry लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 18 जुलाई 2018

बुधवार, 3 मई 2017

क्षणिका - हलफ़नामा

                                                                                       (Pic from http://pixabay.com)


इक हलफ़नामा मेरा भी
चिराग़ गुल हुआ था
जिस दिन, उस दिन
मैं बैठा था बुतखाने में
रोशन - ए - बाग़ - ए - इश्क़ रोज़
बैठा था मैं मयखाने में ... !! 

उत्पल कान्त मिश्र "नादाँ" 
मुंबई 
अप्रैल १७, २०१७ 

मंगलवार, 10 जनवरी 2017

मेरी नदी

                                                                                  (Pic from http://pixabay.com)



जीवन की उत्ताल तरंगें
बहती हरदम उठ – गिर करके
इस तट पर मैं मेरा बैठा
उस तट पर है निर्वाण खड़ा !!

यह तट है इह जीवन मेरा
है उस तट पर ये ध्यान टिका
भाव समंद की लहरों पर मैं
हूँ तरता नित इक नाव बना !!

कल – कल नदिया कहती मुझसे
मैल न दे तू मल सा मुझमें
पालन – तारण सब मैं तेरा
उस तट की नैया ये लहरें !!

जन – मन, संगी – साथी सारे
संग रहते हैं, बन से मन में
दूजा जाने! ये भंवर है
बसता तेरा राम सकल में !!

वह तट ही है तेरा जिसमें
पग ये हों तेरे धीर धरे
पीर पराई जाने जब तू
इस तट खुद तर आयेगा रे !!

इस तट खुद तर आयेगा रे !!

उत्पल कान्त मिश्र “नादां’”
मुंबई
जनवरी १०, २०१७